आम जानकारी है, टैक्स या क़ानूनी सलाह नहीं। GST और ट्रांसपोर्ट के नियम समय-समय पर बदलते हैं। कुछ करने से पहले नीचे दिए सरकारी link देखिए, या अपने CA से पूछिए।
पहले तय करें: कौन-सा बिल देना है
| आपका कारोबार | कौन-सा बिल | बिल पर GST दिखा सकते हैं? |
|---|---|---|
| GST में पंजीकृत (regular), टैक्स वाला सामान बेचते हैं | Tax Invoice (जीएसटी बिल) | हाँ |
| Composition scheme वाले | Bill of Supply | नहीं |
| GST में पंजीकृत नहीं | सादा बिल / Cash Memo | नहीं |
GST नंबर (GSTIN) न हो तो बिल पर GST न जोड़ें और न लें। ज़्यादा जानकारी: Tax invoice, bill of supply या cash memo (English)।
बेचने वाले (आपकी) की जानकारी
- नाम, पता और GSTIN — ठीक वैसा ही जैसा GST पंजीकरण में है।
- बिल नंबर — लगातार चलने वाला नंबर, ज़्यादा से ज़्यादा 16 अक्षर; अक्षर, अंक, - और / चल सकते हैं। एक वित्त-वर्ष में हर नंबर अलग हो। जैसे
GL/26-27/0015। - बिल की तारीख़।
- हस्ताक्षर — आपके या आपके अधिकृत व्यक्ति के (या डिजिटल हस्ताक्षर)।
ख़रीदार की जानकारी
- ख़रीदार GST में पंजीकृत है: उसका नाम, पता और GSTIN।
- पंजीकृत नहीं, और बिल ₹50,000 या ज़्यादा का: नाम, पता, और डिलीवरी का पता राज्य के नाम और कोड के साथ।
- पंजीकृत नहीं, ₹50,000 से कम: ख़रीदार माँगे तो यही जानकारी लिखनी होगी।
ख़रीदार का GSTIN हमेशा उसके certificate से लें या GST portal पर जाँचें — देखिए GSTIN नंबर कैसे चेक करें।
सामान और टैक्स
- HSN कोड (सामान) या SAC (सेवा) — कितने अंक, यह HSN कोड वाले गाइड में।
- सामान का नाम, गिनती और इकाई (जैसे 25 KGS, 10 NOS, 2 BAG)।
- Taxable value — जिस रकम पर टैक्स लगता है (छूट घटाकर)।
- टैक्स की दर और रकम — CGST + SGST (एक ही राज्य में बिक्री) या IGST (दूसरे राज्य में बिक्री), अलग-अलग लिखें।
- Place of supply — दूसरे राज्य में बिक्री हो तो राज्य का नाम।
- Reverse charge लागू है या नहीं — "हाँ" या "नहीं"।
- कुल रकम — अंकों में; शब्दों में लिखना अच्छी आदत है।
कौन-सा टैक्स लगेगा, इसके उदाहरण: CGST + SGST या IGST (English)। हर सामान की दर उसके HSN से तय होती है — GST portal के search में देखिए।
नमूना format (ऊपर से नीचे)
| बिल का हिस्सा | क्या लिखें |
|---|---|
| सबसे ऊपर | "Tax Invoice", आपका नाम, पता, GSTIN, बिल नंबर और तारीख़ |
| ख़रीदार | नाम, पता, GSTIN, राज्य और place of supply |
| सामान की तालिका | नाम, HSN, गिनती-इकाई, भाव, taxable value |
| टैक्स | CGST और SGST (या IGST) — हर दर की रकम अलग |
| जोड़ | कुल taxable value, कुल टैक्स, कुल रकम (अंकों और शब्दों में) |
| सबसे नीचे | Reverse charge हाँ/नहीं, bank/UPI (चाहें तो), हस्ताक्षर |
बड़े कारोबार (जिनका turnover सरकार की तय सीमा से ऊपर है) को B2B बिल के लिए e-invoice बनाना होता है और उसका QR बिल पर छापना होता है — अपनी सीमा सरकारी e-invoice portal पर जाँचें।
कितनी copy, और कब
- सामान: माल गाड़ी में जाने से पहले या उसी समय बिल बने। तीन copy — ORIGINAL FOR RECIPIENT, DUPLICATE FOR TRANSPORTER, TRIPLICATE FOR SUPPLIER।
- सेवा: आम तौर पर सेवा देने के 30 दिन के अंदर; दो copy काफ़ी।
- PDF में भेजा बिल भी चलता है, अगर उसमें सारी ज़रूरी बातें हों।
आम गलतियाँ
- बीच में नंबर छोड़ देना, या साल के बीच में गिनती फिर से 1 से शुरू करना।
- ख़रीदार का GSTIN गलत लिखना।
- दूसरे राज्य की बिक्री पर CGST + SGST लगाना — वहाँ IGST लगता है।
- बिना GSTIN के बिल पर GST जोड़ देना।
- हर पंक्ति को अलग तरह से गोल करना, जिससे जोड़ न मिले।
सरकारी स्रोत
- CBIC — Rule 46, CGST Rules 2017 (Tax invoice)
- GST Council — Tax invoice पर flyer
- GST e-invoice system (सरकारी portal)
GOODLOAD आपकी जानकारी, ख़रीदार, HSN, टैक्स और जोड़ अपने-आप भरता है, और हर बिल का नंबर क्रम से रखता है — हिंदी में, मुफ़्त।
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